संगीत विभाग अकादमिक सत्र २६-२७ | CSJMU

संगीत विभाग अकादमिक सत्र २६-२७ | CSJMU

 

CSJMU संगीत विभाग के लिए 2026-27 सत्र का विस्तृत सार: स्नातक-से-परास्नातक पाठ्यक्रम, प्रवेश-संरचना और करियर-उपाय

परिचय और विभागीय भूमिका

यह लेख छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर के संगीत विभाग के बारे में एक व्यापक संदर्भ प्रस्तुत करता है, जिसमें 2005 से विभाग ने स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर पर संगीत-प्रदर्शन, शिक्षण और रचनात्मक गतिविधियों को एकीकृत करके एक गतिशील दायर बना दी है। विभाग Hindustani शास्त्रीय संगीत के विभिन्न आयाम—गायन, tabla (तबला), कथक, sitar (सितार) और violin (वायोलिन) आदि—के साथ मनोरंजन और नई तकनीकी प्रवृत्तियों को भी साथ लेकर चल रहा है, ताकि छात्र एक समग्र कलाकार के रूप में विकसित हो सकें। साथ ही, पूर्व छात्रों की उपलब्धियाँ, दूरदर्शन-रेडियो के साथ-साथ अन्य सांस्कृतिक मंचों पर उनकी उपस्थिति यह दर्शाती है कि विभाग ने शिक्षण-संस्करण के साथ प्रदर्शन-उन्मुख अवसरों को भी कितना मजबूत किया है। यह भाग एक सजीव समुदाय के रूप में विद्यार्थियों के प्रवेश, विकास और सफलता के लिए एक संरचना ot देता है, ताकि वे अपने सपनों को पंख दे सकें। (पेज: N/A)

2026-27 सत्र के लिए नए पाठ्यक्रमों का आगमन

सत्र 2026-27 में विभाग ने तीन प्रमुख पाठ्यक्रमों को आरंभ करने का निर्णय लिया है, जो विविध रुचियों और करियर-योजनाओं के अनुरूप डिजाइन किए गए हैं। इनमें बीपीए (थिएटर) — रंगमंच कला, अभिनय और मंचन में संपूर्ण डिग्री प्रदान करेगा; बीपीए (वायोलिन/सितार) — एक ही संकाय में दो धाराओं के साथ संचालित होगा; साथ ही एक प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम (ध्वनि रिकॉर्डिंग एवं इंजीनियरिंग) — संगीत और प्रौद्योगिकी के संयुक्त क्षेत्र पर केन्द्रित एक विशेष शिक्षा-आयाम है। 이러한 कार्यक्रम jeune को एक बहु-विषयक दृष्टिकोण अपनाने का अवसर देते हैं, ताकि विद्यार्थी तकनीकी कौशल, प्रस्तुति-निपुणता और रचनात्मक समाधान विकसित कर सकें। (पेज: N/A)

बीपीए (गायन) – गायन के लिए संरचना और अवसर

गायन के क्षेत्र में बीपीए एक तीन-वर्षीय कार्यक्रम है जिसमें छह सेमेस्टर शामिल होते हैं और कुल 25 सीटें उपलब्ध हैं। पहले वर्ष में छात्र-छात्राओं के लिए निर्धारित वार्षिक शुल्क 16,200 रूपए, दूसरे वर्ष 15,800 रुपए और तीसरे वर्ष 16,800 रुपए रखे गए हैं। प्रवेश हेतु योग्यता किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 10+2 है; स्नातक स्तर की डिग्री के साथ हिन्दुस्तानी गायन की मौलिक समझ अपेक्षित मानी जाती है। इस पाठ्यक्रम में राग, ताल, लय के गहरे अध्ययन के साथ साथ शास्त्रीय व सुगम गायन की व्यापक तैयारी करनी होती है, ताकि विद्यार्थी प्रदर्शन-शैली, शिक्षण और शोध दोनों मोर्चों पर सक्षम बन सकें। पाठ्यक्रम का उद्देश्य पेशेवर कलाकार, शिक्षक और शोधार्थी दोनों प्रकार के मार्ग प्रशस्त करना है। (पेज: N/A)

एमए (गायन) – स्नातक पश्चात् उन्नत अध्ययन

गायन में एमए कार्यक्रम दो वर्ष का है और इसकी सीटें 20 रहती हैं। मानक शुल्क पहली वर्ष में 10,200 रुपए और दूसरी वर्ष में 10,800 रुपए निर्धारित हैं। पात्रता के तौर पर बीपीए/बीए (गायन) या अन्य किसी विषय में स्नातक डिग्री के साथ हिन्दुस्तानी गायन के मौलिक ज्ञान की आवश्यकता होती है। यह कार्यक्रम उन विद्यार्थियों के लिए है जो गायन के क्षेत्र में उन्नत अनुशीलन, सैद्धांतिक अध्ययन और शोध-आधारित परियोजनाओं के माध्यम से अपने कौशल को विशिष्ट बनाना चाहते हैं। (पेज: N/A)

बीपीए (तबला) – ताल-यात्रा का गहरा अध्ययन

तबला के लिए बीपीए भी तीन वर्ष का पाठ्यक्रम है जिसमें 10 सीटें उपलब्ध हैं। प्रथम वर्ष के लिए 16,200 रुपए, द्वितीय वर्ष 15,800 रुपए और तृतीय वर्ष 16,800 रुपए शुल्क निर्धारित है। एमए (तबला) के लिए भी 10 सीटें हैं और शुल्क संरचना वही है। पात्रता सभी प्रकार की मान्यता प्राप्त बोर्ड से 10+2 है; स्नातक स्तर पर बीपीए/बीए (तबला/पखावज) जैसी धाराओं के साथ तबला/पखावज वादन का मूल ज्ञान अनिवार्य है। इस पाठ्यक्रम में पारंपरिक तथा आधुनिक ताल-शास्त्र की समेकित समझ विकसित की जाती है, साथ में एकल वादन, संगत कौशल और ऐतिहासिक/आधुनिक धारणाओं के अनुसार शिक्षण-परिप्रेक्ष्य विकसित किया जाता है। (पेज: N/A)

एमए (तबला) – उच्च स्तरीय ताल-शास्त्र

एमए (तबला) के अवसर 2 वर्ष के होते हैं और सीटें 10 होती हैं। फीस संरचना प्रथम वर्ष 10,200 रुपए और द्वितीय वर्ष 10,800 रुपए है। पात्रता बीपीए/बीए (तबला/पखावज) या किसी अन्य स्नातक डिग्री के साथ तबला/पखावज का मूल ज्ञान प्रदान करने की मांग करती है। यह पाठ्यक्रम आधुनिकता के साथ प्राचीन ताल-परंपराओं के गहरे-अध्ययन में विशिष्ट है, ताकि विद्यार्थी शास्त्रीय-अधुनिक ताल-प्रणालियों में शोध, प्रदर्शन और शिक्षण के लिए प्रेरित हों। (पेज: N/A)

कथक – राग-ताल और सुंदर नृत्य-व्यवस्था

कथक के लिए बीपीए 3 वर्ष का मॉडल है जिसमें 20 सीटें निर्धारित हैं; MPए (कथक) 2 वर्ष का है, जिसमें भी 20 सीटें रहती हैं। फीस संरचना पहली वर्ष 16,200, द्वितीय वर्ष 15,800 और तृतीय वर्ष 16,800 रुपए है। पात्रता के मानक वैसे ही हैं—10+2 की मान्यता और कथक-नृत्य का मौलिक ज्ञान, साथ ही बीपीए/बीए (कथक) के साथ स्नातक डिग्री होना आवश्यक है। पाठ्यक्रम में ठाठ, आमद, टुकड़े, परन और गत-फिल्म जैसे प्रस्तुतीकरण-घटक शामिल हैं, जिनके माध्यम से छात्र एकल नर्तक/नृत्यांगना के रूप में दक्ष बनते हैं, और उनकी ताल-लय परक पकड़ मजबूत होती है। एमए के स्तर पर नृत्य निर्देशन, मंच-निर्माण और शिक्षण कौशल पर बल दिया जाता है। (पेज: N/A)

बीपीए (थिएटर) और एमए/MPए – थिएटर-आर्ट्स का समन्वय

थिएटर के लिए बीपीए 3 वर्ष का पाठ्यक्रम है जिसमें 20 सीटें हैं; MPए (थिएटर) 2 वर्ष का पाठ्यक्रम है जिसमें 20 सीटें हैं। प्रवेश-संरचना में 60% व्यावहारिक उत्पादन-आधारित शिक्षण शामिल है—यानी छात्र सीधे मंचीय-प्रोडक्शन, निर्देशन और नाट्य-संरचना के अनुभव लेते हैं। पाठ्यक्रम में प्रोडक्शन-केंद्रित शिक्षण, इंटर-विषयक समन्वय (योग, चित्रांकन, संगीत और थियेटर) और वैश्विक-आकृतिक दृष्टिकोण के साथ भारतीय लोक और शास्त्रीय परंपराओं का संगम किया गया है। प्रमुख विषयों में अभिनय, मंच कला, लेखन, लेखन-सह-निर्देशन, और डिजिटल थिएटर जैसे आधुनिक पहलुओं पर जोर है। उत्तीर्ण विद्यार्थियों के लिए नियमित मंच प्रस्तुतियाँ, कार्यशालाएँ और उत्पादन-कार्य शामिल रहते हैं। (पेज: N/A)

सितार और वायोलिन – दोहरी धारा: वाद्य-आयाम और उन्नत अध्ययन

बिहारी-परंपरा से जुड़ा सितार पाठ्यक्रम बीपीए (सितार) और विभिन्न संकायों में तीन वर्ष के लिए 10-10 सीटों के साथ संचालित होता है, जबकि वायोलिन (BV) के लिए भी समान संरचना है। एमए (सितार) 2 वर्ष का है और सीटें 10 रहती हैं। पात्रता के मानक में बीपीए/बीए (सितार) या संबंधित स्नातक डिग्री के साथ सितार वादन की मौलिक समझ का होना शामिल है। यह कार्यक्रम हिंदुस्तानी-शास्त्रीय वाद्य-धाराओं के परंपरागत ज्ञान के साथ बोल-उच्चारण, अलंकार, पलते, मसीतखानी आदि संरचनात्मक तत्वों पर भी जोर देता है, ताकि विद्यार्थी एकल वादक और संगतकार दोनों रूपों में दक्ष हो सकें, और आकाशवाणी/दूरदर्शन जैसे मंचों के लिए भी योग्य बनें। (पेज: N/A)

डायरेक्शन और शिक्षण-उद्देश्य: विभागाध्यक्ष का संदेश

संगीत विभाग का नेतृत्व छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के संगीत विभागाध्यक्ष के संदेशों के माध्यम से विद्यार्थियों के प्रति गहन संकल्प और प्रेरणा दर्शाता है। विभाग के प्रमुख का मानना है कि संगीत और प्रदर्शन कलाएं सिर्फ एक विषय नहीं, बल्कि एक जीवन-उन्मुख जुड़ाव हैं। चाहे आप शास्त्रीय गायन-तबला-कथक, रंगमंच, या ध्वनि-यांत्रिकी में आवेग चाहते हों, हमारे पाठ्यक्रम इन सभी क्षेत्रों के लिए आवश्यक कौशल, आत्म-विश्वास और अवसर प्रदान करते हैं ताकि आप अपने सपनों को सच कर सकें। इस दृष्टिकोण के अनुरूप, विभाग युवाओं को एक जीवंत समुदाय का हिस्सा बनने के लिए प्रेरित करता है, जहां निर्माणात्मक क्षमताओं के साथ सामाजिक और सांस्कृतिक संदर्भ भी समृद्ध होते हैं। (पेज: N/A)

प्रवेश प्रारंभ और पाठ्यक्रम-समन्वयक और संपर्क

प्रवेश सत्र 2026-27 के लिए विभाग ने सभी पाठ्यक्रमों के लिए स्पष्ट प्रवेश-आधार निर्धारित किए हैं, और प्रत्येक धार के लिए विभागीन समन्वयक उपलब्ध हैं। गायन/सतार/वायोलिन के लिए डॉ. देवानंद पाठक (8812061915), कथक के लिए डॉ. संगीता वीास्तव (8960885533), थिएटर के लिए डॉ. सुंदर पाल (9911690849) और तबला/ध्वनि-यांत्रिकी के लिए तुषार रतूड़ी (8126262868) जैसे अनुभवी शिक्षक-सम्पर्क दिए गए हैं। यह समन्वयक-सूची विद्यार्थियों को प्रवेश-प्रक्रिया के दौरान सही दिशा और मार्गदर्शन प्रदान करती है। साथ ही,(cs) csjmu.ac.in पर पाठ्यक्रम-सूचनाओं के लिए आधिकारिक सूचना उपलब्ध है। (पेज: N/A)

पाठ्यक्रम-आयोजन और करियर-उन्मुख दिशा

इन पाठ्यक्रमों का उद्देश्य छात्रों को केवल प्रस्तुति-क्षमता तक सीमित नहीं रखना है, बल्कि उन्हें प्रशिक्षण-कार्य, शिक्षण, अनुसंधान और सांस्कृतिक आयोजनों के साथ जोड़ना भी लक्ष्य है। राग, ताल और लय के क्रमबद्ध अध्ययन के साथ-साथ शास्त्रीय और सुगम-गायन, कथक-नृत्य, अभिनय-रचना और मंच-निर्देशन जैसी विविधताओं पर बल दिया गया है ताकि विद्यार्थी व्यापक कलात्मक व्यक्तित्व विकसित कर सकें। इसके साथ, ऑडियो-रिकॉर्डिंग, ध्वनि-यांत्रिकी और डिजिटल थिएटर जैसी आधुनिक तकनीकों के साथ तालमेल बैठाकर रोजगार-उन्मुख कौशल भी तैयार किया जाता है। विभाग की यह धारणा है कि संपूर्ण आचार-व्यवस्था से निकलने वाले कलाकारों को शिक्षा-व्यवसाय के साथ-साथ सांस्कृतिक-निर्माण के क्षेत्रों में भी अवसर प्राप्त होते हैं। (पेज: N/A)

आवृत्ति, फीस और संस्थान से जुड़ी अन्य जानकारियाँ

पाठ्यक्रम-वार फीस संरचना में बीपीए (गायन) के लिए 3 वर्ष में क्रमशः 16,200; 15,800; 16,800 रुपए; एमए (गायन) में पहली वर्ष 10,200 और दूसरी वर्ष 10,800 रुपए; बीपीए/एमए के अन्य वाद्यों के लिए भी समान पैटर्न लागू होता है। सीटों की संख्या और पात्रता मानक विभाग की आधिकारिक नीति के अनुसार होती है, ताकि हर कार्यक्रम में संतुलित अवसर उपलब्ध रह सकें। पाठ्यक्रम का निर्माण इस प्रकार किया गया है कि विद्यार्थी सीधे मंच-प्रशासन, रचना-निर्माण और शैक्षणिक मार्गदर्शन के लिए तैयार हों। साथ ही विभाग ने मौजूदा मंचीय कार्यक्रमों, कार्यशालाओं और प्रदर्शन-कार्यक्रमों के नियमित संचालन के द्वारा वास्तविक-जीवन अनुभव भी सुनिश्चित किया है। (पेज: N/A)

समापन और शिक्षा-यात्रा की आमंत्रण

जो छात्र-CSJMU के संगीत विभाग के इस विस्तृत पाठ्यक्रम-संरचना के साथ व्यक्तिगत-रचनात्मक यात्रा शुरू करना चाहते हैं, उनके लिए यह सत्र एक महत्त्वपूर्ण अवसर है। विभाग-प्रशासन और शिक्षकों के प्रतिबद्ध सहयोग के साथ, विद्यार्थी अपनी प्रतिभा को संरचित तरीके से विकसित कर सकेंगे, ताकि वे न केवल शिक्षक बनें, बल्कि कलाकार, शोधकर्ता, आयोजक और शिक्षण-नेतृत्व जैसे विभिन्न भूमिकाओं में भी सफलता प्राप्त कर सकें। यदि आप संगीत-प्रदर्शन, अभिनय या ध्वनि-तकनीक में अपने करियर की दिशा तय करना चाहते हैं, तो CSJMU के इस विभाग के पाठ्यक्रम आपके लिए एक ठोस आधार और विस्तृत अवसर प्रस्तुत करते हैं। (पेज: N/A)

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