gaItaa 1

कलियग ु के लिए श्रीकृष्ण का संदेश गीता जी के अठारह अध्याय के सात सों श्िोकों का सरि अर्थ माध्यम अजन ुथ , संदेश समस्त मानव जातत के लिए 2

िहाभारत का युद्ध और धिम की लडाई िहाभारत के वल एक युद्ध की कथा नहीं है।यह:िानव जीवन,धिम,सत्य,कतमव्य,लोभ,िोह,और ईश्वर के न्याय का सबसे िहान ग्रथ ं िाना जाता है। इस युद्ध िें के वल अस्त्र-शस्त्र नहीं टकराए थे,बमकक:धिम और अधिम,सत्य और असत्य,तथा न्याय और अन्याय आिने-सािने खडे थे। िहाभारत हिें यह मसखाता है मक: जब िनुष्य अहक ं ार और लालच िें अंधा हो जाता है, तो उसका पतन मनमित हो जाता है।और जब िनष्ु य: कमिन पररमथथमतयों िें भी धिम नही छोडता, तो अंत िें मवजय उसी की होती है। हमथतनापुर का राजघराना िहाभारत की कहानी हमथतनापुर से शुरू होती है। हमथतनापुर भारत का िहान और शमिशाली राज्य था। वहााँ:भीष्ि मपतािह,गुरु द्रोणाचायम,कृपाचायम,मवदुर,और अनेक िहान योद्धारहते थे।राजा धतृ राष्र जन्ि से अंधे थे। उनके सौ पुत्र थे मजन्हे “कौरव”कहा गया। दूसरी ओर: पांडु के पााँच पुत्र “पांडव” कहलाए। उनके नाि थे:युमधमिर भीि अजमुन नकुल सहदेवपांडव:धिममिय,सत्यवादी,और मवनम्र थे।जबमक दुयोधन: 3

ं ारी,ईष्यामल,ु और लोभी था।दुयोधन की ईष्यामदुयोधन को पांडवों से बहुत ईष्याम थी।वह देखता था मक:लोग पांडवों से िेि करते हैं,गुरुजन उनका सम्िान करते हैं,और वे युद्धकला िें भी श्रेि हैं। अजमुन की वीरता,भीि की शमि,और युमधमिर की धिममियता उसे अंदर ही अंदर जलाती थी। ईष्याम धीरे-धीरे:घृणा,और घृणा अधिम िें बदलने लगी। आज भी: जब िनुष्य दूसरों की सफलता देखकर जलता है, तो उसके भीतर शांमत सिाप्त होने लगती है। िहाभारत मसखाता है: तुलना और ईष्याम िनुष्य का मवनाश कर देती है।लाक्षागृह और षड्यंत्रदुयोधन ने कई बार पांडवों को िारने का ियास मकया। उसने: लाक्षागृह बनवाया, जो िोि और ज्वलनशील पदाथों से बना था। योजना यह थी मक:पांडव उसिें जलकर िर जाएाँ। लेमकन ईश्वर की कृपा से:पांडव बच गए। यहााँ गीता का एक गहरा संदेश मछपा है: जब तक ईश्वर की इच्छा न हो, अधिम धिम का नाश नहीं कर सकता। द्रौपदी का अपिान िहाभारत का सबसे दुखद और िहत्वपूणम िसंग था: द्रौपदी चीरहरण दुयोधन और शकुमन ने छल से:युमधमिर को जएु िें हर मदया। मफर:राज्य,धन,भाइयों, और अंत िें द्रौपदी तक को दााँव पर लगा मदया गया। सभा िें:द्रौपदी का अपिान मकया गया,लेमकन अमधकांश लोग िौन रहे। यह िहाभारत का सबसे बडा अधिम था। आज भी: जब सिाज अन्याय देखकर चुप रहता है, तब अधिम बढ़ता जाता है। िहाभारत मसखाता है: अन्याय सहना भी अधिम है। 4

जब द्रौपदी ने:सब सहारे छोडकर,पूणम श्रद्धा से श्रीकृष्ण को पुकारा,तब भगवान ने उसकी रक्षा की। यह घटना मसखाती है: जब िनष्ु य सच्चे िन से ईश्वर को पक ु ारता है, तो ईश्वर उसकी रक्षा अवश्य करते हैं। लेमकन इसका अथम यह नहीं मक:िनुष्य किम छोड दे। गीता मसखाती है: श्रद्धा और किम दोनों आवश्यक हैं। वनवास और कष्ट पांडवों को:13 वषम का वनवास मिला। उन्होंने: जंगलों िें जीवन मबताया,कमिनाइयााँ झेलीं,अपिान सहा, मफर भी:धिम का िागम नहीं छोडा। आज:थोडी परेशानी आते ही लोग टूट जाते हैं। लेमकन िहाभारत मसखाता है: कमिन सिय िनुष्य की परीक्षा होता है। जो व्यमि:धैयम, मवश्वास,और धिम नहीं छोडता, वही अंत िें सफल होता है। शांमत का अंमति ियास युद्ध से पहले कृष्ण थवयं शांमत िथताव लेकर गए।उन्होंने कहा:पांडवों को के वल पााँच गााँव दे दो।लेमकन दुयोधन अहक ं ार िें अंधा हो चुका था। उसने कहा:“िैं सूई की नोक के बराबर भूमि भी नहीं दूगाँ ा।”यहीं से थपष्ट हो गया मक:अब युद्ध टालना सभ ं व नहीं। कुरुक्षेत्र — के वल युद्धभूमि नहीं कुरुक्षेत्र के वल एक थथान नहीं था। यह: िनष्ु य के भीतर चलने वाले सघं षम का ितीक है। हर िनष्ु य के भीतर: दुयोधन भी है, और अजमुन भी। जब:लोभ,क्रोध,और अहक ं ार बढ़ते हैं, तो भीतर अधिम बढ़ता है। लेमकन:मववेक,सत्य,और ईश्वर का थिरणिनुष्य को धिम की ओर ले जाते हैं।अजमुन का िोह जब अजमुन ने: 5

िोह से भर गया। उनके हाथ कााँपने लगे, गाण्डीव नीचे मगरने लगा, और उन्होंने युद्ध करने से िना कर मदया। यहीं से भगवद्गीता का िारम्भ होता है। गीता का वाथतमवक जन्ि गीता: मकसी आश्रि िें नहीं, मकसी जंगल िें नहीं,बमकक युद्धभूमि िें दी गई। यह बहुत बडा संदेश है। इसका अथम है: जीवन के संघषों के बीच भी ईश्वर का ज्ञान िाप्त मकया जा सकता है। गीता के वल सन्ं यामसयों के मलए नहीं, बमकक: गहृ थथ,किमयोगी, और सािान्य िनुष्य सभी के मलए है। धिम की वाथतमवक मवजयकौरवों के पास:मवशाल सेना,धन,और शमि थी।लेमकन पांडवों के साथ:धिम,सत्य,और श्रीकृष्ण थे। अंत िें मवजय धिम की हुई। िहाभारत मसखाता है: अधिम कुछ सिय के मलए शमिशाली मदख सकता है, लेमकन थथायी मवजय सत्य की ही होती है। आज के सिय िें िहाभारत का िहत्व आज भी सस ं ार: लोभ, भ्रष्टाचार, थवाथम, और अहक ं ार से भरा हुआ है। लोग:धन के मलए ररश्ते तोड देते हैं,और सफलता के मलए सत्य छोड देते हैं। ऐसे सिय िें िहाभारत और गीता: िनष्ु य को सही िागम मदखाते हैं। वे मसखाते हैं: धिम कमिन हो सकता है, लेमकन वही थथायी शांमत देता है। मनष्कषम िहाभारत के वल इमतहास नहीं है। 6

है। और इसी िहान युद्धभूमि िें: कृष्ण ने अजमुन को वह मदव्य ज्ञान मदया, मजसे आज संसार: श्रीिद्भगवद्गीताके नाि से जानता है। अनक्र ु मणणका 1) महाभारत का युद्ध और धमथ की िडाई 2) यद् ु धभलू म में अजन ुथ का दख ु और मोह 3) आत्मा अमर है — मत्ृ यु का वास्तववक सत्य 7

5) फि की च त ं ा मनुष्य को कमजोर क्यों बनाती है 6) ज्ञानयोग — सच् ा ज्ञान क्या है 7) मनुष्य का सबसे बडा शत्रु — उसका मन 8) क्रोध, िोभ और अहं कार का ववनाश 9) भक्क्त क्या है — केवि पूजा या कुछ और 10) कलियग ु में धमथ क्यों कमजोर हो रहा है 11) अच्छे और बुरे कमथ का प्रभाव 12) समय और भाग्य का रहस्य 13) भय और च त ं ा से मुक्क्त कैसे पाएँ 14) ववद्यार्ी जीवन में गीता का महत्व 15) पररवार और समाज के प्रतत कतथव्य 16) सफिता और शांतत में अंतर 17) धन से बडा क्या है 18) सच् ा सुख कहाँ लमिता है 19) मत्ृ यु से डरना क्यों नह ं ाहहए 20) कहठन समय में गीता कैसे सहारा दे ती है 21) श्रीकृष्ण का नेतत्ृ व और जीवन प्रबंधन 8

23) गीता के महत्वपूणथ श्िोक और उनका सरि अर्थ 24) तनष्कर्थ — जीवन बदिने वािा हदव्य ज्ञानरोजमराथ जीवन में गीता को कैसे अपनाएँ jaya MaI kXVNaa 9

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