Spandan






अनु मिणका

मांक शीषक 1. िनदे शक क कलम से 3. कुस 5. िगरधर गोपाल 7. अ दाता 2. 4. 6. पृ 3 गु 5 मौन का अथ 8 हम लड़क 7 9 10 11 8. आशा के दीप 12 10. वह भूल गया 14 12. भीतर क आवाज 14. आधिुनकता : वैचा रक सागर मंथन 9. 11. 13. 15. 16. िहं दी भाषा 13 मु कान बनी पहचान 15 नौकरी 17 िव ोही किव और किवताएं मृित का बोझ 16 18 19 21 17. आशाएं 19. छायािच 23 व थ रह, सि य रह 25 18. 20. 21. रे त, वाद और सेहत : अ य और अनचाहा मोह: एक अधरूी दा तां 21 22 24

अनु मिणका

मांक

22. शीषक "रे ज बेट" वड ऑफ द ईयर पृ 27 23. कोसारटे डा डै म- कृित, प रवार और अनभ ु ूित का संगम 33 25. मिहला आर ण अिधिनयम-2023 38 24. जीवनशैली संबंधी रोग और पोषण क भूिमका 34

मांक

िनदे शक क कलम से

“भाषा के वल अिभ यि का साधन नह , बि क समाज क चतेना और सं कित ृ क आ मा होती ह।ै” — डॉ. सवप ली राधाकृ णन यह अ यतं स नता का िवषय है िक अिखल भारतीय आयिव ु ान सं थान, रायपरु के राजभाषा को ारा कािशत ऑनलाइन िहदी ू माच 2025ं पि का ' पदन' ं का पं हवां अक ं (अ टबर– 26) आपके सम ततु िकया जा रहा ह।ै यह पि का समय के साथ िनरतर ं िवकिसत होती हई सं थान क सािहि यक, सां कितक ृ एवं बौि क गितिविधय का सश दपण बन चक ु ह।ै वतमान समय म भाषा के वल सवाद ं का ही मा यम नह , बि क ान, नवाचार और सामािजक सहभािगता का आधार भी बन गई ह।ै िहदी ं के मा यम से िचिक सा एवं शै िणक िवषय को सरलता और भावशीलता के साथ जनसामा य तक पहचँाया जा सकता ह।ै इसी िदशा म ' पदन' ं 'िनरतर ं साथक यास करते हए सं थान के िविभ न वग को एक साझा रचना मक मचं दान कर रही ह।ै सं थान म कायरत सकाय ं सद य, अिधकारी, कमचारी एवं िव ाथ अपनी सािहि यक अिभ िच और वैचा रक अिभ यि य के मा यम से इस पि का को समृ बना रहे ह। यह अक ं के वल रचनाओ ं का सकलन नह , बि क िवचार , अनभव ृ मक ऊजा का ितिबबं ह,ै जो ु और सजना ं सं थान क बहआयामी ितभाओ ं को उजागर करता ह।ै vf[ky Hkkjrh; vk;qfoZKku laLFkku] jk;iqj 3

िनदे शक क कलम से

पंदन .

आज के तकनीक और य त जीवन म सािह य एवं भाषा से जड़ाव यि को सवें दनशीलता, ु सकारा मकता और िचतनशील ि कोण दान करता ह।ै मझु े िव ास है िक इस अक ं ं म कािशत लेख, किवताएं एवं िविवध रचनाएं पाठक को ानवधन के साथ-साथ ेरणा एवं आ मीयता का अनभव ु भी कराएगी। ं म राजभाषा को क सपादक मडल ं ं तथा सभी रचनाकार को उनके सराहनीय यास हतेु हािदक शभकामनाए ु ं दतेा ह।ँ आशा है िक आप सभी का सतत सहयोग एवं रचना मक सहभािगता भिव य म भी ' पदन' ं को नई ऊँचाइय तक पहचँाने म सहायक िस होगी। जय िहदी! ं जय राजभाषा! आपका शभाका ु ं ी लेि टनट जनरल अशोक िजदल ं (सेवािनवृ ) कायपालक िनदेशक एवं सीईओ अिखल भारतीय आयिव ु ान सं थान, रायपरु 4 vf[ky Hkkjrh; vk;qfoZKku laLFkku] jk;iqj

पंदन .

पंदन .

गु मितय के आगँन म अब भी ृ मितय ृ के आगँन म अब भी िव ालय क छिवयाँ जगमगाती ह। दीपक-सी िटमिटमाकर जीवन म, किठन राह को आलोिकत कर जाती ह।ै गु को नमन ह.ै.. सादर नमन ह।ै गु क महानता गु जन सभी हमारे पू य रह, पर कछ ु ऐसे भी थे जो वु तारे से भी अिडग और अटल, पथ िदखाने वाले िद य सखे थे। गु को नमन ह.ै... सादर नमन ह।ै ान क मशाल गु से पछने ू पर दडं न िमला न ही कभी अपमािनत िकया गया। ान क योित जलाकर उ ह ने हर सवाल को स मान िदया। गु को नमन ह.ै.. सादर नमन ह।ै vf[ky Hkkjrh; vk;qfoZKku laLFkku] jk;iqj 5

पंदन .

पंदन .

मागदशन अनभव ु क योित िबखरेते िसफ उ र नह , ि भी दतेे। हर िज ासा पर वे सदा नव ान के ार खोल दतेे। गु को नमन ह.ै.. सादर नमन ह।ै जीवन क या ा म गु आज जब अपनी या ा दख े ता ह,ँ हर उपलि ध का आधार वही ह।ै हर सफलता, हर स मान गु जन के ही उपकार ही ह। गु को नमन ह.ै.. सादर नमन ह।ै आप भी गु वर ह और सच कहँ तो, वे गु दवे आप भी ह और आप म से कई।ं आपके िवचार ने हर िदन नव ान क राह िदखाई। गु को को नमन ह.ै.. सादर नमन ह।ै अजनु िसहं अवर ेणी िलिपक निसग थापना 6 vf[ky Hkkjrh; vk;qfoZKku laLFkku] jk;iqj

पंदन .

पंदन .

कस ु म कस ु हँ कोई आम कस ु नह मरेा भी एक अलग तबा है मरेी भी एक अलग पहचान है अ छे -अ छे खौफ खाते ह मझसे ु य िक म िसफ बैठने क चीज नह म स ा का तीक कहलाती हँ जो मझु पर बैठा वही ऊँचा िदखा मरेी ही वजह से दिनया ु झक ु जाती है मरेे िलए लोग बदल जाते ह। अपने भी पराए बन जाते ह मझु े पाने के िलए लोग अपना घर-बार तक छोड़ दतेे ह। वाद-ेइरादे सब भल ू जाते ह बस मझु े पाने म जटु जाते ह म आज हँ कल नह , ये सच ह।ै िफर भी हर कोई मझु े पाना चाहता ह।ै जो आज मरेा मािलक है कल िकसी और को सौप जाता ह।ै म कस ु हँ यह याद रहे म िकसी क सगी नह होती जो मझु े सभाल ं न पाए, म उसक कभी नह होती। वदना ं आनदं पु तकालय प रचारक क ीय पु तकालय ए स रायपरु vf[ky Hkkjrh; vk;qfoZKku laLFkku] jk;iqj 7

पंदन .



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